Sunday, May 24, 2026

तेरे नैनों की कटारी

तेरे नैनों की कटारी 
दिल पर मेरे यूं चली
हर जगह बस तू दिखे, 
ऐसी खुमारी है चढ़ी।
तेरे नैनों की कटारी 
दिल पर मेरे यूं चली, 
हर जगह बस तू दिखे, 
ऐसी खुमारी है चढ़ी।

तेरे हर दर्द को 
दर्द मैं अपना बना लूं, 
तेरे हर ख्वाब को 
अपना मैं सपना बना लूं।

तुझसे ही अब दिन मेरा,
रातें ढलें, 
तुझसे ही हर सांस मेरी, 
तुझसे ही धड़कन चले।

तू रहे जो सामने, 
फूलों सी दुनिया लगे, 
होकर तुझसे दूर, 
गुलशन में भी कांटे लगें।

तेरे नैनों की कटारी 
दिल पर मेरे यूं चली, 
हर जगह बस तू दिखे, 
ऐसी खुमारी है चढ़ी।

आइने भी छेड़ते मुझको सनम, 
मेरी छवि में तुझको दिखाएं
जैसे कि अब हों ही ना हम, 
काजल सजे खुद नैनों में मेरे,
अधरों में खुद लाली लगे, 
कैसा दीवाना हो गया हूं! 
मुझमें बसी मुझे तू लगे।

तेरे इश्क की ये जादूगरी, 
पल-पल मेरी बीमारी बढ़े।

तेरे नैनों की कटारी 
दिल पर मेरे यूं चली, 
हर जगह बस तू दिखे, 
ऐसी खुमारी है चढ़ी।

तुझको पाने की खातिर 
सांसें हैं ज़िद पर अड़ी, 
नैनों की गलती थी मेरी, 
नैनों से तेरी क्यों लड़ी?

तेरे नैनों की कटारी 
दिल पर मेरे यूं चली, 
हर जगह बस तू दिखे, 
ऐसी खुमारी है चढ़ी।
ऐसी खुमारी है चढ़ी, 
ऐसी खुमारी है चढ़ी।

लेखक अम्बरीष चन्द्र भारत 

तेरे नैनों की कटारी

तेरे नैनों की कटारी  दिल पर मेरे यूं चली हर जगह बस तू दिखे,  ऐसी खुमारी है चढ़ी। तेरे नैनों की कटारी  दिल पर मेरे यूं चली,  हर जगह बस तू दिख...