बिन यारों के ज़िंदगी
ज़िंदगी यारों के बिन बेकार है-
न हों यार-चार ज़िंदगी में,
तो जीना दुश्वार है |
कोई दर्द हो,
ग़म हो कोई-
बाँट लेते है सब,
ऐसे मेरे यार है |
हो कोई ख़ुशी या-
जन्म दिन का जश्न,
कूटते बेशुमार है |
हारो जो कभी ज़िंदगी में-
जोश भरते है नया,
शान से ज़िंदगी जीने की -
दिखाते राह है |
मेरे यार रहे साथ सदा-
दिल की मेरी ये चाह है,
यूँ तो हँसते-हंसाते रहते हैं-
वक्त आने पर साथ रहते,
बनते दहकते अंगार है |
ज़िंदगी क्या है ये ज़िंदगी-
बिन यारों के ज़िंदगी बेकार है |
अम्बरीष चन्द्र 'भारत'