मोहब्बत बेहिसाब रखती है
वो जो बातों में अपनी-
फूलों की बरसात रखती है,
वो जो ज़ुल्फ़ों में अपनी -
शीतलता की छाँव रखती है,
वो जो महका दे महफ़िल-
जो बज़्म में पांव रखती है |
फूलों की बरसात रखती है,
वो जो ज़ुल्फ़ों में अपनी -
शीतलता की छाँव रखती है,
वो जो महका दे महफ़िल-
जो बज़्म में पांव रखती है |
वो जो गुलाबी पैरों में -
पायल की छनकार रखती है,
वो जो गोरी कलाइयों में-
चूड़ियों की खनकार रखती है,
वो जो सुर छेड़ कर-
दीवाना बना दे,
मधुर ऐसी आवाज़ रखती है |
वो जो मुस्कुराकर-
नैना झुकाकर,
क़त्ल करने का अंदाज़ रखती है,
वो जो अपनी धड़कन में -
मेरी सांसो की किताब रखती है |
वो जो हुस्न का सागर है-
और नैनो में अपने शराब रखती है |
मैं मिट सकता हूँ-
हर जनम में उसके लिए,
जो मेरे लिए-
दिल में मोहब्बत बेहिसाब रखती है-
दिल में मोहब्बत बेहिसाब रखती है|
हर जनम में उसके लिए,
जो मेरे लिए-
दिल में मोहब्बत बेहिसाब रखती है-
दिल में मोहब्बत बेहिसाब रखती है|
अम्बरीष चन्द्र 'भारत'